Friday, February 8, 2019

बेपरवाह

एक मुद्दत हुई है यूँ बेपरवाह हुए हुए,
यूँ ही बैठे रहे हों बेख्याल बेफिक्र से
दे दिये हों पंख अपनी सोच को परवाज़ के लिए,
और एक आसमान बेहद, बेलौस और बेइंतहा

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