Friday, September 4, 2009

ज़िंदगी

ज़िन्दगी इस कदर तनहा तो न थी की तेरा ख्याल आता,
मौत भी बेवफा न थी जो ज़िन्दगी का सवाल आता...
अपनी सूनी महफिलों को तेरी यादों से रौशन करते रहे हम,
जिन राहों ने ठुकराया उन्हीं पर चलते रहे हम,
हम यूँ तो न थे की तेरी खुशियों को देख कर मलाल आता,
मौत भी बेवफा न थी जो ज़िन्दगी का सवाल आता...

ऐ इश्क, हमने भी तुम्हें कभी अपनाया था,
हमारी ज़िन्दगी में भी कभी मुहब्बत का हसीं साया था,
पर किस्मत को गवारा न था कीहमारी चाहत पर जलाल आता,
मौत भी बेवफा न थी जो ज़िन्दगी का सवाल आता...

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